UPCM की अध्यक्षता में लोक भवन में मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न

लखनऊ (11 जून, 2019)।
UPCM
की अध्यक्षता में लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

वृृद्धावस्था पेंशन योजनान्तर्गत 60 वर्ष से 79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों को प्रदान की जा रही पेंशन राशि को 400 रु. प्रतिमाह प्रति लाभार्थी से बढ़ाकर 500 रु. प्रतिमाह प्रति लाभार्थी किये जाने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित की जाने वाली वृृद्धावस्था पेंशन योजनान्तर्गत 60 वर्ष से 79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों को प्रदान की जा रही पेंशन राशि को 400 रु. प्रतिमाह प्रति लाभार्थी से बढ़ाकर 500 रु. प्रतिमाह प्रति लाभार्थी किये जाने का निर्णय लिया है।

वर्तमान में प्रदेश में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित वृृद्धावस्था पेंशन योजना में आच्छादित होने वाले 60 वर्ष से 79 वर्ष आयु वर्ग के लाभार्थियों को 200 रुपये केन्द्रांश और 200 रुपये राज्यांश अर्थात कुल 400 रुपये प्रतिमाह की धनराशि पेंशन के रूप में प्रदान की जा रही है। इसी प्रकार 80 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग के वृृद्धजनों को 500 रुपये प्रतिमाह की धनराशि शत-प्रतिशत केेन्द्रांश से पेंशन के रूप में प्रदान की जा रही है।

वृृद्धावस्था पेंशन की धनराशि 200 रुपये राज्यांश व 200 रुपये केन्द्रांश, अर्थात कुल 400 रुपये प्रतिमाह प्रति लाभार्थी में दिनांक 01 जनवरी, 2019 से 100 रुपये प्रतिमाह प्रति लाभार्थी राज्यांश में बढ़ोत्तरी करते हुए 300 रुपये राज्यांश व 200 रुपये केन्द्रांश, अर्थात कुल 500 रुपये प्रतिमाह प्रति लाभार्थी कर दिया गया है। इससे राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदान की जा रही अन्य पेंशन योजनाओं के अनुरूप समरूपता हो जाएगी और वृृद्धजनों को पर्याप्त आर्थिक सहायता भी प्राप्त हो सकेगी। इस बढ़ोत्तरी से राज्य सरकार पर वित्तीय वर्ष 2018-19 में 03 माह हेतु राज्यांश के रूप में 106.84 करोड़ रुपये एवं वित्तीय वर्ष 2019-20 में लगभग 480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय-भार आयेगा।

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा (पच्चीसवां संशोधन) नियमावली, 2019 को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा (पच्चीसवां संशोधन) नियमावली, 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी। इस निर्णय से बी0एड0 अहर्ताधारी अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त होने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली की अधिसूचना दिनांक 28 जून, 2018 में जूनियर बेसिक स्कूलों (कक्षा 01 से 05) में सहायक अध्यापक के पदों पर नियुक्ति हेतु एन.सी.टी.ई. द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से शिक्षा स्नातक (बी.एड.) को अर्हकारी प्रशिक्षण योग्यता मान्य किया गया है, किन्तु इस प्रकार अध्यापक के रूप में नियुक्ति व्यक्ति को प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के 02 वर्ष के भीतर एन.सी.टी.ई. द्वारा मान्यता प्राप्त प्राथमिक शिक्षा में 06 महीने का एक सेतु पाठ्यक्रम (ब्रिज कोर्स) आवश्यक रूप से पूरा करना होगा। एन.सी.टी.ई. द्वारा मान्य की गयी इस अर्हता को संशोधन के माध्यम से उ.प्र. बेसिक शिक्षा नियमावली में सम्मिलित किया जा चुका है। इस नियमावली के बीसवें संशोधन के परिशिष्ट में बी.टी.सी. ट्रेनिंग का उल्लेख है, अतएव नियमावली के परिशिष्ट-4 में बी.टी.सी. प्रशिक्षण के स्थान पर नियम-8 की प्रशिक्षण अर्हताएं सम्मिलित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली-1981 के 15वें संशोधन का परिशिष्ट-2 जो वर्तमान में अप्रासंगिक हो गया है, को निकाले जाने का भी फैसला लिया गया है। एन.सी.टी.ई. की अधिसूचना दिनांक 28 जून, 2018 से प्रवृत्त है। अतः यह संशोधन दिनांक 28 जून, 2018 से लागू होंगे।

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में सीनियर रेजिडेन्ट के पद पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में सीनियर रेजिडेन्ट के पद पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिये संस्थान की प्रथम विनियमावली-2011 के नियम-69 (3) को इस प्रकार से संशोधित कर दिया है- ‘भारत सरकार की रेजीडेन्सी स्कीम के अन्तर्गत सीनियर रेजीडेंट के पद पर नियुक्ति के लिए आयु सीमा 37 वर्ष होगी, अनूसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों के अभ्यर्थियों के मामले में आयु सीमा में 05 वर्ष की छूट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के अनुसार अन्य श्रेणियों पर छूट लागू होगी।’

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आदेश दिनांक 06 फरवरी, 2018 द्वारा केन्द्र सरकार के अधीन अस्पतालों/स्वायतशासी संस्थाओं में सीनियर रेजीडेन्ट के पद पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित की गयी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 06 मार्च, 2018 द्वारा भारत सरकार की रेजीडेन्सी स्कीम को स्वीकार करते हुए सीनियर रेजीडेन्ट के पद पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष किये जाने के आदेश निर्गत किये गये हैं। एम्स, नई दिल्ली की भाँति संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में भारत सरकार की रेजीडेन्सी स्कीम को स्वीकार करते हुए सीनियर रेजीडेन्ट की नियुक्ति के लिये अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष किये जाने का निर्णय लिया गया है।

उत्तर प्रदेश यवासवनी (छठवां संशोधन) नियमावली-2019 प्रख्यापित किए जाने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में लघु यवासवनी (माइक्रो ब्रिवरी) की स्थापना हेतु वर्तमान में प्रचलित उत्तर प्रदेश यवासवनी नियमावली, 1961 में माइक्रो ब्रिवरी से सम्बन्धित नियम सम्मिलित करते हुए उत्तर प्रदेश यवासवनी (छठवां संशोधन) नियमावली-2019 प्रख्यापित किए जाने का निर्णय लिया है।

निर्णय के अनुसार यवासवनी (ब्रिवरी) स्थापना हेतु अनुज्ञापन प्रदान करने के लिए वर्ष 1974 से निर्धारित लाइसेंस फीस 25,000 रुपए से बढ़ाकर 2,50,000 रुपए की गयी है। साथ ही, लाइसेंस के नवीनीकरण फीस में भी वृद्धि की गयी है। यवासवनियों द्वारा बीयर के थोक विक्रय के अनुज्ञापियों से प्राप्त इन्डेन्ट में सन्निहित प्रतिफल शुल्क और अतिरिक्त प्रतिफल शुल्क की धनराशि को 02 कार्यदिवस में राजकोष में जमा न करने पर 5,000 रुपए प्रतिदिन की दर से जुर्माना आरोपित किया जाएगा।

लघु यवासवनी (माइक्रो ब्रिवरी) की स्थापना हेतु कोई व्यक्ति जो होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेन्ट एवं वाणिज्यिक क्लब हेतु बार लाइसेंसधारी हो, सम्बन्धित जिले के जिलाधिकारी के माध्यम से आबकारी आयुक्त को आवेदन करेगा। अनुज्ञापनधारी द्वारा समस्त शर्तें पूरी करने पर जिलाधिकारी द्वारा की गयी संस्तुति के आधार पर आबकारी आयुक्त शासन की पूर्वानुमति से लघु यवासवनी हेतु अनुज्ञापन स्वीकृत करेंगे।

लघु यवासवनी हेतु आवेदन पत्र के साथ 50,000 रुपए की धनराशि देय होगी। लघु यवासवनी हेतु अनुज्ञापन शुल्क 2,00,000 रुपए प्रति वर्ष होगा। इसके अतिरिक्त अनुज्ञापी 1,00,000 रुपए की प्रतिभूति धनराशि भी उपलब्ध कराएगा। लघु यवासवनी का अनुज्ञापन 01 अप्रैल से शुरू होकर आगामी वर्ष के 31 मार्च तक वैध होगा। प्रत्येक आबकारी वर्ष हेतु अनुज्ञापन के नवीनीकरण के लिए 2,00,000 रुपए देय होगा। अनुज्ञापन की शर्तों का अनुपालन करने में विफल होने पर अनुज्ञापन बिना किसी क्षति की भरपाई किए ही निरस्त कर दिया जाएगा। अनुज्ञापनधारी, 25,000 रुपए की फीस जमा करके अनुज्ञापन की वैधता 06 माह हेतु बढ़वा सकता है। लघु यवासवनी की अधिष्ठापित क्षमता प्रतिदिन 600 ब.ली. और वर्ष में 350 कार्य दिवस के आधार पर 2.1 लाख ब.ली. से अधिक नहीं होगी।

वर्तमान में प्रदेश में नोएडा, आगरा, वाराणसी व लखनऊ आदि शहरों में देशी/विदेशी पर्यटकों का आवागमन काफी बढ़ा है। प्रदेश में लघु यवासवनी स्थापित होने पर जहां अच्छी गुणवत्ता की फ्रेश बीयर उपभोक्ताओं को रेस्टोरेन्ट में उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी तरफ रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे एवं प्रदेश के राजस्व में भी सम्यक रूप से वृद्धि होगी। भारत के अन्य राज्यों यथा-महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, दिल्ली, तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों के बड़े-बड़े शहरों में स्थित होटलों/रेस्टोरेन्ट में लघु यवासवनी स्थापित हुई हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में जारी वित्तीय स्वीकृतियों 
का विवरण मंत्रिपरिषद के समक्ष बजट मैनुअल के प्रस्तर-94 के अन्तर्गत प्रस्तुत किया गया
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में जारी वित्तीय स्वीकृतियों का विवरण मंत्रिपरिषद के समक्ष बजट मैनुअल के प्रस्तर-94 के अन्तर्गत प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में 09 औद्योगिक आस्थान एवं 05 मिनी औद्योगिक आस्थानों के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण हेतु विभागीय कार्यदायी संस्था, उ.प्र. लघु उद्योग निगम, कानपुर द्वारा गठित आगणनों के सापेक्ष 700 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गयी।

जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्रों के आधुनिकीकरण एवं उच्चीकरण योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रदेश के 05 जनपदों (आगरा, बरेली, सहारनपुर, आजमगढ़ व गाजियाबाद) हेतु प्रति जनपद 80 लाख रुपए (कुल 400 लाख रुपए) की स्वीकृति प्रदान की गयी।

उत्तर प्रदेश में उत्पादों की पहचान बढ़ाने, उनमें कार्यरत शिल्पियों की आय बढ़ाने और अधिकाधिक रोजगार के अवसर विकसित करने के उद्देश्य से दिनांक 25 जनवरी, 2018 से प्रारम्भ की गयी ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्राविधानित बजट धनराशि 25,000 लाख रुपए के सापेक्ष विभिन्न मदों में 15,057.40 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गयी। इस योजना के अन्तर्गत निम्नलिखित योजनाएं प्रारम्भ की गयी हैं:-
1- वित्त पोषण हेतु सहायता योजना।
2- सामान्य सुविधा केन्द्र प्रोत्साहन योजना।
3- विपणन सहायता योजना
‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना के अन्तर्गत चयनित उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए जनपद में काॅमन फैसिलिटी सेन्टर, टेस्टिंग लैब, डिजाइन स्टूडियो, प्रशिक्षण प्रदर्शनी/ट्रेड प्वाइंट आदि की स्थापना करने, उत्पाद को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास, ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देना एवं केन्द्र/राज्य सरकारों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं में ODOP के तहत चयनित उत्पादन के प्रस्तावों को प्राथमिकता देना आदि कार्य किए जा रहे हैं।

एसाइड योजनान्तर्गत राज्य स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति द्वारा अनुमोदित बास्केट के अन्तर्गत अवशेष 15 परियोजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कराने हेतु उत्तर प्रदेश निर्यात अवस्थापना विकास योजना प्रारम्भ की गयी हैं। इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुदान संख्या-3 के अन्तर्गत 05 स्थापनाधीन परियोजनाओं हेतु धनराशि हेतु 500 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गयी।

भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गयी सूक्ष्म, लघु एवं उद्यम क्लस्टर विकास योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष-2018-19 के आय-व्ययक में प्रावधानित धनराशि 101.00 लाख रुपये के सापेक्ष रेडीमेड-गारमेन्ट क्लस्टर, बरेली की परियोजना हेतु अवशेष धनराशि 79.44 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली की भूमि पर विद्यमान भवनों के ध्वस्तीकरण के सम्बन्ध में निर्णय
मंत्रिपरिषद ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली की भूमि पर विद्यमान भवनों के ध्वस्तीकरण के सम्बन्ध में निर्णय लिया है। जिलाधिकारी रायबरेली की आख्या के अनुसार एम्स रायबरेली के निर्माण हेतु भारत सरकार को हस्तगत की गयी भूमि पर टाइप-1 के 47 एवं टाइप-3 के 29, कुल 76 जर्जर आवासीय भवन संसूचित किए गए हैं। एम्स रायबरेली को सुचारू रूप से संचालित किए जाने हेतु इन भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा। भवनों के ध्वस्तीकरण के फलस्वरूप 150.67 लाख रुपए की धनराशि को बट्टे खाते में डाला जाएगा। एम्स, रायबरेली के सुचारू रूप से संचालन हेतु इन भवनों के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया है।

प्रदेश की जनता को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा जनपद-रायबरेली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना का निर्णय लिया गया था। एम्स की स्थापना हेतु नन्दगंज सिरोही शुगर मिल की 97.69 एकड़ भूमि भारत सरकार को दिनांक 27 जुलाई, 2013 को हस्तगत की जा चुकी है।

एम्स, रायबरेली के निर्माण योजना के अन्तर्गत फेज-1 का कार्य पूर्ण करते हुए दिनांक 13 अगस्त, 2018 से स्टार्टअप ओ.पी.डी. प्रारम्भ की जा चुकी है तथा वर्तमान में फेज-2, जिसके अन्तर्गत हास्पिटल और मेडिकल काॅलेज का निर्माण सम्मिलित है, का कार्य प्रगति पर है। इसके 03 अप्रैल, 2020 तक पूर्ण होने की सम्भावना है।

एम्स रायबरेली का निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा कराते हुए रायबरेली एवं निकटवर्ती जनपदों के निवासियों को उच्चस्तरीय चिकित्सीय सुविधायें उपलब्ध करायी जा सकेगी।
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