मंत्री डाॅ. नीलकंठ तिवारी ने अकादमी की नवीनीकृत वेबसाइट का लोकार्पण किया

लखनऊ (13 फरवरी, 2020)।
राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी की योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रदेश को 07 क्षेत्रों में वर्गीकृत करते हुए क्षेत्रीय कला प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है, इसी के क्रम में लखनऊ, प्रयागराज क्षेत्र की प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं पुरस्कार वितरण 13 फरवरी, 2020 अकादमी परिसर लाल बारादरी भवन, कैसरबाग, लखनऊ में किया गया। डाॅ. नीलकंठ तिवारी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य, प्रोटोकाल विभाग, उत्तर प्रदेश ने प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव, संस्कृति, पर्यटन भाषा एवं सामान्य प्रशासन, उ0प्र0 शासन के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।



मंत्री द्वारा प्रदर्शनी के पुरस्कृत 03 कलाकारों शिखा पाण्डेय-लखनऊ, उत्कर्ष जायसवाल-प्रयागराज एवं पल्लवी सिंह-मऊ को अकादमी की ओर से पुरस्कार राशि, स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री द्वारा अकादमी के इस आयोजन के उद्देश्यों, पुरस्कृत कलाकारों की कृतियों की सराहना की गयी।

इस अवसर पर अकादमी की नवीनीकृत वेबसाइट का मंत्री जी द्वारा लोकार्पण किया गया और अकादमी द्वारा लोक कलाओं पर आधारित विशिष्ट प्रकाशन के रूप में प्रकाशित ‘लोक रीति-रिवाज’ ग्रन्थ का विमोचन भी किया गया व ग्रन्थ के लेखक डाॅ. रामशब्द सिंह - सहारनपुर को अंगवस़्त्र देकर सम्मानित किया गया।



साथ ही अकादमी एवं इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट्स, छत्रपति शाहूजी महाराज, विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकार शिविर में सृजित कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं शिविर के कैटलाग का विमोचन भी मंत्री द्वारा किया गया। अंतर्राष्ट्रीय चित्रकार शिविर के कानपुर विश्वविद्यालय में स्थानीय संयोजक के रूप में कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने वाले डाॅ0 बृजेश स्वरूप कटियार, विभागाध्यक्ष, ललित कला संस्थान, कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर को अंगवस़्त्र देकर सम्मानित किया गया।

संस्कृति मंत्री द्वारा राज्य ललित कला अकादमी, उ0प्र0 द्वारा प्रकाशित लोक रीति-रिवाज ग्रन्थ को आने वाली पीढी के लिए प्रेरक बताया एवं उन्होंने कहा कि युवा पीढी को इसे जरूर पढना चाहिए यह हमारी लोक संस्कृति से जुड़ने का एक माध्यम है। साथ ही मंत्री द्वारा पुस्तक के मुख्य आकर्षण पीड़िया, गोधना, कोहबर, नागपंचमी के अवसर पर बनने वाले चित्रों पर भी चर्चा की गयी। मंत्री द्वारा राज्य ललित कला अकादमी की नवीनीकृत वेबसाइट को आधुनिक डिजिटल युग की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी बताया गया। मंत्री जी द्वारा वेबसाइट के मुख्य आकर्षण पर भी प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष, डाॅ0 राजेन्द्र सिंह पुण्ढीर द्वारा की गयी। समारोह में पधारे मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कलाकारों, कला प्रेमियों, प्रेस प्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों का स्वागत अकादमी के सचिव, डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर द्वारा किया गया। डाॅ0 राठौर द्वारा क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी की योजना के सम्बन्ध में बताया कि अकादमी की गतिविधियों को विकेन्द्रित करने की दृष्टि से और प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में निवासरत् कलाकारों को अकादमी की गतिविधियों में सम्मिलित करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कला प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है।



डाॅ0 राठौर ने अवगत कराया कि राज्य ललित कला अकादमी, उ0प्र0 की लगभग 20 साल बाद नवीनीकृत वेबसाइट तैयार कर आज लोकार्पित की गयी है इस वेबसाइट के माध्यम से ललित कला अकादमी न केवल प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल रूप में अपनी गतिविधियों को प्रचारित एवं प्रसारित करने में अग्रसर होगी। वेबसाइट के माध्यम से ललित कला विधा के छात्रों/छात्राओं, शोधार्थियों एवं स्वतंत्र कलाकारों को अकादमी से सम्बन्धित आयोजनों की सूचना तो प्राप्त होगी ही साथ ही अकादमी के समकालीन कला के अमूल्य संग्रह से भी वह परिचित हो सकेंगे। लोक कला के क्षेत्र में अकादमी द्वारा एक अमूल्य ग्रन्थ ‘लोक रीति-रिवाज’ प्रकाशित किया गया है। इस ग्रन्थ के माध्यम हमारी लोक विरासत के प्रतीक चैक पूरना, कोहबर, विवाह-गारी गीत, चैत्र नवमी, सांझी, अहोई अष्टमी, दीपावली, गोधन पूजा, पीड़िया, छठ पर्व, देवउठानी एकादशी, गोदना, सती-चौरा, डीह-चैरा आदि से सम्बन्धित चित्रों के महत्व एवं प्राचीनता से सभी परिचित हो सकेंगे। साथ ही अवगत कराया कि प्रदर्शनी दिनांक 17 जनवरी, 2020 तक पूर्वान्ह 11ः00 बजे से सायं 06ः00 बजे तक जनसामान्य के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।
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