UPCM के समक्ष सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग का प्रस्तुतिकरण किया गया

लखनऊ (11 जून, 2019)।
UPCM
के समक्ष लोक भवन में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग का प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रस्तुतिकरण के दौरान UPCM ने विभागीय कार्य-कलापों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। उन्होंने शासकीय कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के निर्देश देते हुए कहा कि राज्य में ई-गवर्नेन्स योजना सभी स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू की जाए।

प्रस्तुतिकरण देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक सिन्हा ने UPCM को विभाग के कार्य-कलापों के विषय में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी नीति के कार्यान्वयन से सम्बन्धित नीतिगत मामलों, इलेक्ट्राॅनिक्स प्रसंस्करण उपकरण (कम्प्यूटर) से सम्बन्धित आवश्यकताओं के समन्वय, राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग (हार्डवेयर, साॅफ्टवेयर तथा सेवाओं) के विकास की सुविधा प्रदान करना, ऑप्टिकल फाइबर केबिल ऑपरेटर्स को ‘राइट ऑफ वे’ अनुमतियां प्रदान करना, शासन में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहन और उसकी सुविधा प्रदान करना, जन सामान्य को सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं उपलब्ध कराने के उपायों को प्रोत्साहन प्रदान करना, ई-काॅमर्स को प्रोत्साहन प्रदान करना, प्रदेश में स्कूलों, काॅलेजों, विश्वविद्यालयों में उच्च गुणवत्तायुक्त सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा, प्रशासनिक प्रणालियों को अधिक सक्रिय, सुलभ, सरल और सहानुभूतिपूर्ण बनाना तथा नेशनल ई-गवर्नेन्स प्लान के अंग के रूप में, राज्य ई-गवर्नेन्स योजना के संचालन से सम्बन्धित कार्य किए जाते हैं।

अपर मुख्य सचिव ने UPCM को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों के विषय में जानकारी देते हुए अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2017 के अन्तर्गत नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र को ‘इलेक्ट्राॅनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन (ई.एम.जेड.)’ घोषित किया गया है। नीतियों के अन्तर्गत निवेशकों को अनुमन्य किए जाने वाले ‘वित्तीय प्रोत्साहनों को रोजगार सृजन से सम्बद्ध’ किया गया है। सम्पूर्ण राज्य में इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण के विस्तार के उद्देश्य से पूर्व ‘उ.प्र. इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2017’ का संशोधन/पुनरीक्षण प्रक्रियान्तर्गत है। ‘उ.प्र. सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट-अप नीति-2017’ उद्घोषित की गई है। प्रदेश में 150 करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 15,000 रोजगार सम्भावनाओं युक्त आई.टी. पाक्र्स की स्थापना मेरठ, आगरा, गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ और बरेली में की जा रही है।

अपर मुख्य सचिव ने इस क्षेत्र के अन्तर्गत निवेश की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में 68 एम0ओ0यू0 हस्ताक्षरित हुए हैं, जिनका निवेश मूल्य 55,283 करोड़ रुपए है। इस क्षेत्र के तहत अब तक प्रदेश में 58,955 करोड़ रुपए का निवेश आया है, जिससे 04 लाख 10 हजार 989 रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने इलेक्ट्राॅनिक्स नीति के कार्यान्वयन में आने वाली कठिनाइयों एवं लम्बित प्रकरणों के विषय में भी UPCM को अवगत कराया। UPCM ने इन कठिनाइयों को शीघ्र दूर करने और लम्बित प्रकरणों को त्वरित गति से निस्तारित करने के निर्देश दिए।

अपर मुख्य सचिव ने UPCM को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे स्टार्ट-अप सेक्टर की उपलब्धियों के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ई-गवर्नेन्स क्षेत्र की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि प्रदेश में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने तथा मोबाइल टावर्स की स्थापना हेतु शासकीय विभागों, संस्थाओं, समितियों इत्यादि की अनुमति के लिए आवेदन हेतु एक ऑनलाइन पोर्टल (राइट ऑफ वे) बनाया गया है। उन्होंने UPCM हेल्पलाइन 1076 के विषय में भी जानकारी दी और ई-टेण्डरिंग प्रणाली पर भी प्रकाश डाला। UPCM ने ई-टेण्डरिंग में आने वाली समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को लागू करने के लिए अगले सप्ताह तैयारी करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव द्वारा UPCM को वर्ष 2019-20 और 2020-21 की विभागीय कार्य योजनाओं के विषय में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

बैठक के दौरान UP_Dy_CM डाॅ. दिनेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव कुमार मित्तल, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल सहित सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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