मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में ग्राम्य विकास के अधिकारी सक्रिय सहयोग दें

लखनऊ (12 जुलाई, 2019)।
महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जरूरत के मुताबिक समन्वय स्थापित करने के लिए ग्राम्य विकास विभाग से सम्बन्धित फील्ड स्तर के अधिकारियों को समुचित योगदान दिये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव की ओर से प्रदेश के समस्त मुख्य विकास अधिकारियों को विगत 4 जुलाई, 2019 को जारी शासनादेश में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण व लैंगिग अनुपात को बनाये रखने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को प्रोत्साहन देकर उन्हें स्वावलम्बी बनाने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना संचालित की जा रही है।

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पूर्व में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उच्च स्तर पर समीक्षा के दौरान यह अपेक्षा की गयी है कि इस योजना के तहत संचालित की जा रही विभिन्न गतिविधियों में अन्य विभागों की सक्रिय भागीदारी प्राप्त की जाये। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के सभी प्राप्त आवेदन पत्रों का खण्ड विकास अधिकारी द्वारा स्थलीय व भौतिक सत्यापन कराकर जनपद स्तर पर लाॅगिन कर अग्रसारित करने की जिम्मेदारी दी गयी है।

इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग के कर्मियों के माध्यम से योजना का प्रचार-प्रसार करने तथा पात्र व्यक्तियों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना एवं उनकी सहायता करने की भी जिम्मेदारी दी गयी है। इसके साथ ही खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय में प्राप्त ऑफ़लाइन आवेदन पत्रों को ऑनलाइन कराने हेतु जिला प्रोवेशन अधिकारी को भेजने जैसे कार्य भी शामिल हैं।

शासनादेश में कहा गया है कि इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को आत्म निर्भर बनाने के साथ ही बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है। इसलिए इस योजना का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाये और इसकी सफलता के लिए लगातार अनुश्रवण किया जाये।
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